न होगा यक बयाबां मांदगी से ज़ौक़ कम मेरा / ग़ालिब

न होगा यक-बयाबां मांदगी[1] से ज़ौक़[2] कम मेरा
हबाब-ए-मौजा-ए-रफ़्तार[3] है नक़्श-ए-क़दम[4] मेरा

मुहब्बत थी चमन से लेकिन अब ये बेदिमाग़ी है
कि मौजे-बूए-गुल[5] से नाक में आता है दम मेरा

शब्दार्थ
1. ↑ बहुत अधिक थक जाना
2. ↑ उत्साह
3. ↑ गतिमान तरंग पर बना बुलबुला
4. ↑ पद-चिन्ह
5. ↑ गुलाब की सुगंध की लहर

श्रेणी: ग़ज़ल

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